कांगड़ा
करीब 13 वर्षों तक 'कोमा' (Persistent Vegetative State) जैसी स्थिति में रहने के बाद, 31 वर्षीय हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की ऐतिहासिक अनुमति मिल गई है। इस भावुक कर देने वाले फैसले के साथ ही उस परिवार का संघर्ष भी चर्चा में है, जिसकी जड़ें हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा से जुड़ी हुई हैं।
कांगड़ा से दिल्ली और फिर गाजियाबाद का सफर
हरीश के पिता, अशोक राणा मूल रूप से हिमाचल के कांगड़ा जिले के रहने वाले हैं। वह साल 1989 में रोजगार की तलाश में दिल्ली आए थे और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक निजी होटल में केटरिंग का काम करने लगे।
परिवार दिल्ली के महावीर एन्क्लेव में रहता था। हालांकि, साल 2013 में हुए हादसे के बाद बेटे की देखभाल के लिए परिवार को अपना तीन मंजिला मकान बेचना पड़ा और वे गाजियाबाद (राजनगर एक्सटेंशन) में शिफ्ट हो गए।
एक हादसे ने बदली हंसती-खेलती जिंदगी
हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) के अंतिम वर्ष के छात्र थे और एक होनहार वेटलिफ्टर भी थे। रक्षाबंधन का अगला दिन था। हरीश अपने पीजी (पेइंग गेस्ट) की चौथी मंजिल से अचानक नीचे गिर गए।
इस हादसे में उनके सिर में गहरी चोट आई, जिसके बाद वे कभी होश में नहीं आ सके। वे क्वाड्रिप्लेजिया (Quadriplegia) नामक स्थिति से जूझ रहे थे, जिसमें शरीर 100% निष्क्रिय हो जाता है।
4,500 से ज्यादा दिनों का संघर्ष
पिता अशोक राणा ने बताया कि उन्होंने बेटे को बचाने के लिए चंडीगढ़ PGI से लेकर दिल्ली AIIMS तक के चक्कर लगाए, लेकिन सुधार नहीं हुआ। आर्थिक तंगी के बीच पिता ने स्थानीय स्पोर्ट्स ग्राउंड के पास सैंडविच और स्प्राउट्स बेचकर घर चलाया, जबकि छोटा भाई आशीष 'लक्ष्मण' की तरह बड़े भाई की सेवा में लगा रहा।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने हरीश की स्थिति को देखते हुए पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी। यह भारत में अपनी तरह का पहला मामला है जहाँ अदालत ने ट्यूब के जरिए दिए जा रहे पोषण (Feeding Tube) को हटाने की मंजूरी दी है, ताकि मरीज गरिमा के साथ विदा हो सके।
अंगदान का मिसाल पेश करता फैसला
परिवार ने फैसला लिया है कि हरीश की इच्छा मृत्यु के बाद, उनके जो अंग स्वस्थ होंगे, उन्हें दान किया जाएगा ताकि वे अन्य पांच लोगों को नई जिंदगी दे सकें। वर्तमान में हरीश को दिल्ली AIIMS के पैलिएटिव केयर सेंटर में भर्ती किया गया है, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में धीरे-धीरे उपचार वापस लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।