हमीरपुर
'बम-बम भोले' के जयकारों और भक्तिमय वातावरण के साथ आज हमीरपुर जिला के ऐतिहासिक एवं पौराणिक गसोता महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पांडव काल से जुड़े इस मंदिर में सुबह तड़के 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो बाबा के स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए आतुर दिखे।
पांडव काल से जुड़ा है गहरा इतिहास
मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस स्थान पर समय व्यतीत किया था। मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना माना जाता है। आज उत्सव की शुरुआत पारंपरिक झंडा रस्म के साथ हुई, जिसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना की गई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।
स्वयंभू शिवलिंग की अद्भुत कथा
जनश्रुति के अनुसार, सदियों पहले एक किसान जब अपने खेत में हल जोत रहा था, तो उसका हल एक पत्थर से टकराया। पहले प्रहार पर जलधारा निकली। दूसरी बार टकराने पर दूध की धारा बही।
तीसरी बार जब हल लगा तो रक्त निकलने लगा और किसान की आंखों की रोशनी चली गई। बाद में किसान को स्वप्न में महादेव ने दर्शन दिए, जिसके बाद वहां खुदाई कर स्वयंभू शिवलिंग निकाला गया और उसे मंदिर में स्थापित किया गया। स्थापना के बाद किसान की आंखों की रोशनी भी वापस आ गई।
भक्तों और पुजारियों के विचार
मंदिर के पुजारी महंत श्री श्री 1008 राघवानंद गिरी जी ने बताया कि गसोता महादेव की महिमा शब्दों का नहीं, अपितु अनुभव का विषय है। उन्होंने कहा कि यहाँ जो भी भक्त सच्चे मन से आता है, महादेव उसकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
मंदिर कमेटी के सदस्य राकेश ने बताया कि मंदिर लोगों की प्राचीन आस्था का केंद्र है और हर साल शिवरात्रि पर यहाँ भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी साझा किया कि वे हर वर्ष इस पावन दिन पर यहाँ माथा टेकने और आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं। मंदिर परिसर को फूलों और लाइटों से भव्य रूप से सजाया गया है।
प्रशासन और मंदिर कमेटी द्वारा भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जहाँ हल लगने से बहा था दूध और खून, उस गसोता महादेव में शिवरात्रि की भारी धूम। पांडव कालीन गसोता मंदिर में उमड़ी हजारों की भीड़, जलाभिषेक कर मांग रहे मन्नतें।