धर्मशाला।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों का सीधा असर अब हिमाचल प्रदेश के पर्यटन केंद्र धर्मशाला में दिखने लगा है। जिला मुख्यालय के मुख्य पेट्रोल पंपों पर तेल की भारी किल्लत पैदा हो गई है, जिसके चलते प्रबंधन को मजबूरन तेल की बिक्री में कटौती (Rationing) करनी पड़ रही है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि यदि आज दोपहर तक नई सप्लाई नहीं पहुँची, तो शहर के मुख्य पंप 'ड्राई' हो सकते हैं।
कोतवाली बाजार स्थित मुख्य पेट्रोल पंप पर तेल के सीमित स्टॉक को देखते हुए प्रबंधन ने अपने स्तर पर बिक्री की सीमा तय कर दी है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार:
दोपहिया वाहन: अधिकतम ₹200 का पेट्रोल।
चौपहिया वाहन (कार): अधिकतम ₹1000 का पेट्रोल।
डीजल: प्रति वाहन अधिकतम ₹1500 की सीमा तय।
हालांकि, राहत की बात यह है कि एंबुलेंस और रेगुलर रूट की बसों को प्राथमिकता के आधार पर उनकी आवश्यकतानुसार पूरा तेल उपलब्ध करवाया जा रहा है।
पेट्रोल पंप प्रबंधक देविंद्र पठानिया ने बताया कि स्थिति काफी चिंताजनक है। उन्होंने कहा, हमने तेल कंपनियों को 80 लाख रुपये की एडवांस पेमेंट जमा करवा दी है। कंपनी ने तीन गाड़ियाँ भेजने का आश्वासन दिया था, लेकिन सूचना मिली है कि केवल एक ही गाड़ी (10 हजार लीटर पेट्रोल और 10 हजार लीटर डीजल) अलोकेट हुई है,
वह भी अभी तक पहुँची नहीं है। प्रबंधक के अनुसार, अधिकारी फोन नहीं उठा रहे हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में बड़े व्यवधान के संकेत मिल रहे हैं।
धर्मशाला के कोतवाली बाजार स्थित इस पंप पर सामान्यतः प्रतिदिन 10 से 12 हजार लीटर तेल की खपत होती है। वर्तमान में स्थिति यह है केवल 7 हजार लीटर पेट्रोल (4 हजार लीटर स्पीड और 3 हजार लीटर नॉर्मल) और 14 हजार लीटर डीजल बचा है। कटौती के बावजूद यह स्टॉक बुधवार दोपहर 11 से 12 बजे तक ही चल पाएगा। इसके बाद पंप पर 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटक सकते हैं।
सरकार की ओर से कटौती के कोई निर्देश नहीं हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि स्टॉक खत्म होने से पहले हर किसी को थोड़ा-थोड़ा तेल मिल सके, ताकि किसी की गाड़ी रास्ते में न खड़ी हो। सप्लाई चैन में मिडिल ईस्ट संकट का असर साफ दिखने लगा है। — देविंद्र पठानिया, प्रबंधक, पेट्रोल पंप धर्मशाला
शहर के बीचों-बीच स्थित पंप पर तेल की राशनिंग की खबर फैलते ही वाहन चालकों में अफरा-तफरी का माहौल है। लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल करवाने पहुँच रहे हैं, लेकिन सीमा तय होने के कारण उन्हें सीमित तेल से ही संतोष करना पड़ रहा है। यदि आगामी 24 घंटों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक सेवाओं पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।