शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का परिसर बुधवार को भारी नारों और राजनीतिक गहमागहमी का गवाह बना। आगामी पंचायत चुनावों में देरी और नियमों में बदलाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सदन की कार्यवाही से पहले विपक्षी विधायकों ने परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का गला घोंटने की कोशिश कर रही है और पंचायत चुनावों को टालने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
विवाद का मुख्य केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई वह नोटिफिकेशन है, जिसमें जिला उपायुक्तों (DCs) को आरक्षण रोस्टर में 5 प्रतिशत तक बदलाव करने की अनुमति दी गई है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर आरक्षण रोस्टर में देरी कर रही है ताकि अपने चहेतों को लाभ पहुँचाया जा सके।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार नियमों में बदलाव के लिए 'बैक डेट' (पुरानी तारीख) से नोटिफिकेशन जारी करने की कोशिश कर रही है, जो पूरी तरह से असंवैधानिक और गलत है। भाजपा का आरोप है कि उपायुक्तों को 5% बदलाव का अधिकार देना चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक सीधा प्रयास है।
मीडिया से बात करते हुए जयराम ठाकुर ने सीधे मुख्यमंत्री सुक्खू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री अपनी ज़िद पर अड़े हुए हैं। वे जनता का सामना करने से डर रहे हैं, इसलिए चुनाव टालने के बहाने खोजे जा रहे हैं। जिला स्तर पर रोस्टर में बदलाव की अनुमति देना न्यायसंगत नहीं है।
भाजपा विधायक दल ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को केवल सड़क या परिसर तक सीमित नहीं रखेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी है कि आरक्षण रोस्टर और पंचायत चुनावों में हो रही देरी के मुद्दे को विधानसभा के भीतर भी पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा।