तोलोलिंग की लड़ाई को बताया सबसे कठिन मिशन, बोले- आज पहले से कहीं अधिक आधुनिक और मजबूत है भारतीय सेना।
शिमला। कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर कारगिल युद्ध के नायक और पूर्व सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने युद्ध के दिनों को याद करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध लड़ना उनके जीवन का सबसे बड़ा गर्व है।
उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, माइनस तापमान और दुश्मन की लगातार गोलाबारी के बावजूद भारतीय सेना ने अदम्य साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया तथा देश का तिरंगा विजय के साथ लहराया।
ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने बताया कि तोलोलिंग की पहाड़ी पर कब्जा करना कारगिल युद्ध का सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण मिशन था। उस समय वह 18 ग्रेनेडियर्स का नेतृत्व कर रहे थे। इस अभियान में 25 वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इसके बाद भारतीय सेना ने हम्प और टाइगर हिल पर भी विजय प्राप्त कर युद्ध की दिशा बदल दी।
उन्होंने कहा कि कारगिल की ऊंची चोटियों पर माइनस तापमान, सिर छिपाने तक की जगह न होना और दुश्मन की लगातार फायरिंग जैसी विषम परिस्थितियों में भी भारतीय सैनिक पीछे नहीं हटे। उनके साहस और समर्पण ने असंभव प्रतीत होने वाले मिशन को भी सफल बनाया। उन्होंने कहा कि युद्ध का हर दृश्य और हर पल आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा है।
ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने कहा कि कारगिल युद्ध के समय और आज की भारतीय सेना में बड़ा अंतर है। वर्तमान में सेना पहले की तुलना में अधिक आधुनिक, सशक्त और तकनीकी रूप से सक्षम है।
उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान जैसी चुनौतियां आज भी मौजूद हैं, लेकिन भारतीय सेना हर परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने भविष्य के युद्धों में आधुनिक तकनीक की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन तकनीक के प्रभावी उपयोग ने यह साबित कर दिया है कि आने वाले समय में युद्धों में अत्याधुनिक
तकनीक और ड्रोन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
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