बिलासपुर I
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स बिलासपुर (AIIMS Bilaspur) में चिकित्सा लापरवाही का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ इलाज के लिए आई एक महिला ने आरोप लगाया है कि अस्पताल स्टाफ की गलती के कारण उनकी स्वस्थ आंख में दवाई डाल दी गई, जिससे उनकी परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
शहर के निहाल सेक्टर की निवासी सुनीता ठाकुर ने बताया कि वह 23 अप्रैल 2026 को अपनी बाईं (Left) आंख में हो रही समस्या के उपचार के लिए एम्स पहुंची थीं। महिला का आरोप है कि जांच के दौरान डॉक्टर और संबंधित स्टाफ ने घोर लापरवाही बरती और उनकी बाईं आंख के बजाय दाईं (Right) आंख में दवाई डाल दी।
गलत उपचार से बढ़ी मुसीबत
महिला के अनुसार, गलत आंख में दवाई डाले जाने के तुरंत बाद उन्हें तेज जलन और दर्द शुरू हो गया। वर्तमान में उन्हें धुंधला दिखाई देने और लगातार असहजता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सुनीता ठाकुर ने इस घटना को डॉक्टर और उनकी टीम की सामूहिक लापरवाही करार दिया है।
अस्पताल प्रशासन को भेजी लिखित शिकायत
पीड़ित महिला ने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपकर कई मांगें उठाई हैं पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाए। लापरवाही बरतने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो। भविष्य में होने वाले किसी भी दुष्प्रभाव के लिए संस्थान को जवाबदेह ठहराया जाए। पूरी घटना की एक विस्तृत लिखित रिपोर्ट उन्हें प्रदान की जाए।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि अस्पताल प्रशासन ने समय रहते इस पर उचित कार्रवाई नहीं की और उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वह इस मामले को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और उपभोक्ता अदालत जैसे कानूनी मंचों पर लेकर जाएंगी।
वहीं, इस संवेदनशील मामले पर अब तक एम्स प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन इस घटना ने प्रदेश के सबसे बड़े संस्थान की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।