78 साल का हिमाचल: रियासतों के विलय से आधुनिकता के शिखर तक, अब 'आत्मनिर्भरता' की सबसे बड़ी चुनौती

78 साल का हिमाचल: रियासतों के विलय से आधुनिकता के शिखर तक, अब 'आत्मनिर्भरता' की सबसे बड़ी चुनौती
78 साल का हिमाचल: रियासतों के विलय से आधुनिकता के शिखर तक, अब 'आत्मनिर्भरता' की सबसे बड़ी चुनौती

Published:

शिमला।

15 अप्रैल 1948 को छोटी-छोटी रियासतों के विलय से अस्तित्व में आया हिमाचल प्रदेश आज अपनी स्थापना के 78वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह सफर आज रोबोटिक सर्जरी, 100% साक्षरता और आधुनिक बागवानी तक पहुँच गया है।

हालांकि, 'राजस्व घाटा अनुदान' (RDG) बंद होने के बाद अब देवभूमि के सामने अपने दम पर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने की एक नई और कठिन चुनौती खड़ी है।

15 अप्रैल 1948 को छोटी रियासतों को मिलाकर हिमाचल बना था। 26 जनवरी 1951 में सी श्रेणी राज्य व और पहली नवंबर 1956 में केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला। 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था।

अब देश के 17 राज्यों के साथ हिमाचल भी उस सूची में शामिल हो गया है,

जहां राजस्व घाटा अनुदान बंद हो चुका है। ऐसे में अब पहाड़ को अपने दम पर विकास को राह में आगे बढ़ाने की चुनौती है।

गठन के समय हिमाचल की स्वास्थ्य सेवाएं पारंपरिक वैद्यों पर निर्भर थीं और शिक्षा का दायरा बहुत सीमित था। लेकिन दशकों के प्रयासों ने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है।

एम्स (AIIMS) और सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की स्थापना के साथ अब प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। हिमाचल ने लगभग 100% साक्षरता दर हासिल कर देश में मिसाल कायम की है। दुर्गम गांवों तक सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है और अब एयर व रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित है।

हिमाचल अब उन 17 राज्यों की सूची में शामिल है, जिन्हें केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) मिलना बंद हो गया है। इस आर्थिक दबाव से निपटने के लिए राज्य सरकार ने 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में कदम बढ़ाए हैं जल विद्युत परियोजनाओं पर 'वॉटर सेस' (Water Cess),

बिजली प्रोजेक्ट्स में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाना और वैज्ञानिक तरीके से खनन गतिविधियों का विस्तार। केवल सैर-सपाटे तक सीमित न रहकर पर्यटन को ग्रामीण स्तर तक ले जाने और इसे रोजगार का मुख्य आधार बनाने की रणनीति।

सेब के साथ-साथ अन्य फलों की खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाना। सौर ऊर्जा और उद्योगों में निवेश आकर्षित कर युवाओं के लिए रोजगार सृजित करना।

सात मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में हिमाचल ने विकास की जो नींव रखी है, वह आज आर्थिक दबावों के बीच भी डगमगाई नहीं है। यदि हिमाचल अपने अधिकारों, विशेषकर जल और बिजली पर अपने हक की लड़ाई जीतने में सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में यह देश के सबसे समृद्ध राज्यों में गिना जाएगा।

इस खबर के विषय

संबंधित खबरें

घवांडल पशु चिकित्सालय में पशु जन्म नियंत्रण शिविर, 15 कुत्तों की सफल नसबंदी

घवांडल पशु चिकित्सालय में पशु जन्म नियंत्रण शिविर, 15 कुत्तों की सफल नसबंदी

पशु चिकित्सालय घवांडल में आयोजित पशु जन्म नियंत्रण शिविर में 15 श्वानों की सफल शल्य चिकित्सा की गई। इनमें 7 मादा और 8 नर कुत्ते शामिल रहे। शिविर का उद्देश्य ...

पूरा पढ़ें (Read More) →
करंट लगने से इकलौते बेटे की मौत, दो महीने बाद भी परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा प्रशासन; चार बहनों और बुजुर्ग माता-पिता का था सहारा

करंट लगने से इकलौते बेटे की मौत, दो महीने बाद भी परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा प्रशासन; चार बहनों और बुजुर्ग माता-पिता का था सहारा

बिलासपुर के श्री नयना देवी जी क्षेत्र के भटेड गांव में करंट लगने से जान गंवाने वाले गुरमेल सिंह के परिवार ने प्रशासन पर सुध न लेने का आरोप लगाया है। परिवार क...

पूरा पढ़ें (Read More) →
13 नवंबर को मंडी में CM सुक्खू के नेतृत्व में निकलेगी एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन, तैयारियों में जुटा प्रशासन

13 नवंबर को मंडी में CM सुक्खू के नेतृत्व में निकलेगी एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन, तैयारियों में जुटा प्रशासन

हिमाचल को चिट्टे के नशे से मुक्त बनाने के उद्देश्य से 13 नवंबर को मंडी में एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू...

पूरा पढ़ें (Read More) →
बीबीएमबी मामले पर विक्रमादित्य सिंह बोले- वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी हिमाचल के हक की लड़ाई, चंडीगढ़ में भी जारी रहेगी हिस्सेदारी की मांग

बीबीएमबी मामले पर विक्रमादित्य सिंह बोले- वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी हिमाचल के हक की लड़ाई, चंडीगढ़ में भी जारी रहेगी हिस्सेदारी की मांग

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बीबीएमबी में हिमाचल की हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इस कानूनी लड़ाई क...

पूरा पढ़ें (Read More) →
BBMB मामले में हिमाचल को बड़ी जीत, हर साल 600 से 1000 करोड़ रुपये का होगा फायदा: हर्षवर्धन चौहान

BBMB मामले में हिमाचल को बड़ी जीत, हर साल 600 से 1000 करोड़ रुपये का होगा फायदा: हर्षवर्धन चौहान

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने BBMB मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हिमाचल की बड़ी जीत बताया है। उनके अनुसार प्रदेश को 11,975 मिलियन यूनिट बिजली की बका...

पूरा पढ़ें (Read More) →

इससे पहले और बाद की खबरें