मंडी।
हिमाचल प्रदेश की भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परियोजना शुरू की गई है। इसरो की ओर वित्तपोषित यह परियोजना हिमालयी क्षेत्र में 6 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंपों के लिए समय-स्वतंत्र पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने पर केंद्रित है।
शुरूआत में यह परियोजना मंडी में केंद्रित रहेगी। इस अध्ययन से यह साफ होगा कि कहां किस तीव्रता के साथ भूकंप का असर हो सकता है। इसके अलावा कहां भूकंप आने की अधिक संभावना है। यह भी पता चलेगा। यहां के बाद यह अध्ययन अन्य जगहों पर आगे बढ़ेगा।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक भूकंपीय आंकड़ों के साथ उपग्रह आधारित ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम यानी जीएनएसएस और इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक एपर्चर रडार यानी इन-सार तकनीकों का समन्वित उपयोग किया जाएगा।
जीएनएसएस के माध्यम से पृथ्वी की सतह पर प्रति वर्ष कुछ मिलीमीटर तक की प्लेट गति को मापा जा सकता है। जबकि इन-सार तकनीक से बड़े क्षेत्रों में भूमि के उठने, धंसने और भ्रंश रेखाओं पर तनाव के संकेतों की पहचान संभव होती है। इससे भूकंप से पहले होने वाले दीर्घकालिक भू-गतिकीय परिवर्तनों को समझने में मदद मिलेगी।
आईआईटी मंडी के सिविल और पर्यावरण अभियांत्रिकी स्कूल में संचालित इस परियोजना की अवधि 36 महीने तय की गई है। इस दौरान उच्च स्तरीय डेटा संग्रह, मॉडलिंग और सत्यापन का कार्य किया जाएगा।
अध्ययन के तहत मंडी और आसपास के क्षेत्रों में भू-संरचना, ढलानों, चट्टानों के प्रकार और पुराने भूकंपीय आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। परियोजना का नेतृत्व आईआईटी मंडी के महेश रेड्डी कर रहे हैं। जबकि डेरिक्स पी शुक्ला और धन्या जे सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में जुड़े हैं