म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में नए नियम लाएंगे और पारदर्शिता एवं सुरक्षा - सुनील डोगरा

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में नए नियम लाएंगे और पारदर्शिता एवं सुरक्षा - सुनील डोगरा
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में नए नियम लाएंगे और पारदर्शिता एवं सुरक्षा - सुनील डोगरा

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म्यूचुअल फंड उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा के उद्देश्य से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलावों की घोषणा की है।

लगभग तीन दशकों से लागू नियमों में यह व्यापक सुधार 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य आम निवेशकों के धन को अधिक सुरक्षित बनाना तथा फंड प्रबंधन कंपनियों की जवाबदेही को मजबूत करना है।

फाइनेंशियल कंसल्टेंट सुनील डोगरा ने बताया कि सेबी द्वारा रियल-टाइम रिस्क अपडेट का प्रावधान एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अनुसार यदि किसी म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में 5 प्रतिशत से अधिक परिवर्तन होता है, तो संबंधित फंड हाउस को तुरंत अपना रिस्क-ओ-मीटर अपडेट करना अनिवार्य होगा।

पहले म्यूचुअल फंड कंपनियां जोखिम से जुड़ी जानकारी केवल महीने में एक बार साझा करती थीं। नई व्यवस्था से निवेशकों को हर समय यह स्पष्ट रहेगा कि उनका निवेश किस स्तर के जोखिम में है।

दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव फंड संचालन खर्च से संबंधित है। सेबी ने अब इन खर्चों की नई सीमा निर्धारित कर दी है जिससे निवेशकों को ज्यादा फंड वैल्यू मिलेगी । रिटायरमेंट और चिल्ड्रन फंड कैटेगरी को धीरे-धीरे बंद कर उनकी जगह लाइफ साइकिल फंड शुरू किए जाएंगे, लाइफ साइकिल फंड का मतलब 5,10,15,20,30 साल के लिए फंड्स होंगे जिससे निवेशकों

को अपने गोल्स निर्धारित करने में सहायता मिलेगी। गोल्ड-सिल्वर की वैल्यूएशन भी अब भारतीय एक्सचेंज की कीमतों के आधार पर होगी।

सुनील डोगरा के अनुसार एक और अहम बदलाव फंड मैनेजरों की जवाबदेही को लेकर किया गया है। नए नियमों के तहत फंड मैनेजरों को अपनी कुल आय का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा उसी स्कीम में निवेश करना होगा जिसे वे स्वयं प्रबंधित कर रहे हैं।

यदि उनके निर्णयों से फंड को नुकसान होता है, तो उसका प्रभाव उनके व्यक्तिगत निवेश पर भी पड़ेगा। इससे फंड मैनेजर अधिक जिम्मेदारी और सावधानी के साथ निवेश निर्णय लेने के लिए प्रेरित होंगे।

इसके अतिरिक्त स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स के लिए प्रत्येक तीन महीने में स्ट्रेस टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक करना अनिवार्य किया गया है। इस परीक्षण का उद्देश्य यह देखना है कि यदि बाजार में अचानक गिरावट आती है तो फंड हाउस निवेशकों को उनका पैसा लौटाने की स्थिति में हैं या नहीं। इससे निवेशकों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

नियामक संस्था ने प्रत्येक एसेट मैनेजमेंट कंपनी के लिए इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड बनाना भी अनिवार्य कर दिया है। किसी तकनीकी त्रुटि, धोखाधड़ी या अन्य असामान्य परिस्थिति में निवेशकों को होने वाले नुकसान की भरपाई इसी फंड से की जाएगी।

सुनील डोगरा ने बताया कि देश में बैंक, पोस्ट ऑफिस, बीमा कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थान भी निवेश के गारंटीड और टैक्स फ्री रिटर्न जैसे कई विकल्प प्रदान करते हैं। इसलिए निवेशकों को चाहिए कि वे किसी भी निवेश से पहले नियामक संस्थाओं द्वारा जारी दिशानिर्देशों और शर्तों की पूरी जानकारी प्राप्त करें और उसके बाद ही निर्णय लें।

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