सराज (मंडी/कुल्लू)
मंडी और कुल्लू सराज के आराध्य देव मार्कण्डेय ऋषि मंगलौर के ऐतिहासिक देव कारज बुधवार को पूरी भव्यता और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुए। देवता अब स्वर्ण रथ (गाडू) से सुशोभित हो गए हैं। इस पावन अवसर पर समूचा सराज क्षेत्र "देव मार्कण्डेय" के जयकारों से गूंज उठा और हजारों देवलुओं ने देवता के इस नूतन स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
पुष्पवर्षा और बसंत गीतों के साथ हुआ स्वागत
उत्सव का आगाज बुधवार सुबह मंजा गांव में देवता की प्राण प्रतिष्ठा (गाडू) रस्म के साथ हुआ। यहाँ स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक 'बसंत के गीत' गाकर देवता का भावपूर्ण स्वागत किया। इसके पश्चात देवरथ हजारों श्रद्धालुओं के साथ कंढेरी गांव पहुंचा। यहाँ का नजारा और भी अद्भुत था, जहाँ लोगों ने अपने घरों की छतों से पुष्पवर्षा की और अखरोट फेंककर अपनी आस्था प्रकट की।
सोने के आभूषणों से दमका देवरथ
इस बार देव मार्कण्डेय ऋषि के रथ को विशेष रूप से सजाया गया है। देवता के नए आभूषण, टोप और हार वस्त्र शुद्ध सोने से निर्मित किए गए हैं। स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित देवता का विग्रह देखते ही बन रहा था।
देवता के इन स्वर्ण आभूषणों और वस्त्रों को बनाने में तीन महीने का समय लगा है और ये सब जन सहयोग,लोगों की देवता के प्रति आस्था से दिए दान से बनाया गया है। देव समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया, जिनका स्वागत ढोल-नगाड़ों की थाप पर किया गया।
5000 श्रद्धालुओं ने ग्रहण की 'देव धाम'
देवता के इस विशेष उत्सव में सराज और आसपास के क्षेत्रों से लगभग पांच हजार लोग एकत्रित हुए।
सामुदायिक भोज: इस अवसर पर देवता के हरियानों (सेवादारों) द्वारा विशाल 'धाम' का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
देव संदेश: गूर के माध्यम से देवता ने समूचे इलाके में सुख-शांति, समृद्धि और आपसी भाईचारा बनाए रखने का आशीर्वाद दिया।
कुल्लवी नाटी पर झूमे देवलु
दोपहर बाद उत्सव का माहौल और भी रंगीन हो गया जब देवता के सम्मान में भव्य कुल्लवी नाटी का आयोजन हुआ। स्थानीय लोगों और देवलुओं ने ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की गूंज के बीच देवता के स्वर्ण रथ के साथ नृत्य किया और इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाया।