3 मार्च को चंद्र ग्रहण: सत्ता, नेतृत्व और जनमत में उथल-पुथल के संकेत - पं. शशिपाल डोगरा

3 मार्च को चंद्र ग्रहण: सत्ता, नेतृत्व और जनमत में उथल-पुथल के संकेत - पं. शशिपाल डोगरा
3 मार्च को चंद्र ग्रहण: सत्ता, नेतृत्व और जनमत में उथल-पुथल के संकेत - पं. शशिपाल डोगरा

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शिमला।

वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष एवं प्रख्यात अंक ज्योतिषी पंडित शशिपाल डोगरा ने बताया कि 3 मार्च 2026, फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, मंगलवार को चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से सायं 6:47 बजे तक घटित होगा।

यह ग्रहण भारत में दृश्य रहेगा। ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र तथा सिंह राशि पर पड़ रहा है, जिसे सत्ता, नेतृत्व, प्रशासन और प्रतिष्ठित पदों के लिए विशेष संवेदनशील माना जाता है।

पंडित डोगरा ने बताया कि चंद्र ग्रहण का सूतक 3 मार्च प्रातः 6:20 बजे से प्रारंभ होगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रखे जाएंगे। परंपरा के अनुसार सूतक और ग्रहण काल में नाखून काटना, मूर्ति स्पर्श, अनावश्यक भोजन और निद्रा वर्जित मानी गई है।

बालक, वृद्ध, रोगी और गर्भवती महिलाएं आवश्यकता अनुसार भोजन या औषधि ले सकती हैं। सूतक के दौरान दूध, दही, अचार आदि में कुशा डालकर सुरक्षित रखने की परंपरा भी प्रचलित है।

15 दिनों में दो ग्रहण: राजनीतिक हलचल के संकेत

पंडित डोगरा ने कहा कि 17 फरवरी 2026 को लगे सूर्य ग्रहण के बाद 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का पड़ना अत्यंत संवेदनशील और उथल-पुथल भरा ज्योतिषीय संयोग है। एक ही पक्ष में दो ग्रहण पड़ना सत्ता, नेतृत्व, जनमत और प्रशासनिक ढांचे में तीव्र परिवर्तन का संकेत देता है।

उनके अनुसार सूर्य ग्रहण राष्ट्र प्रमुख, सरकार, उच्च पदों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करता है, जबकि चंद्र ग्रहण जनता की भावना, विपक्ष की सक्रियता, मीडिया के खुलासों और जनआंदोलनों को प्रबल करता है।

पंडित शशिपाल डोगरा‌ ने आशंका जताई कि इन 15 दिनों के भीतर और उसके बाद देश व प्रदेश की राजनीति में तीव्र हलचल, आरोप-प्रत्यारोप, नीतिगत बदलाव, बड़े प्रशासनिक फेरबदल और संभावित नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों को लेकर बहस तेज हो सकती है। महत्वपूर्ण विधेयकों पर राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा। विपक्ष आक्रामक रणनीति अपनाएगा, वहीं सत्ता पक्ष को जनविश्वास बनाए रखने के लिए त्वरित और कठोर निर्णय लेने पड़ सकते हैं। न्यायिक सक्रियता, जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई या किसी बड़े खुलासे से राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ सकता है।

हिमाचल में संगठनात्मक बदलाव की संभावना

हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में पंडित शशिपाल डोगरा ने कहा कि संगठनात्मक बदलाव, मंत्रिमंडल विस्तार या पुनर्गठन, दल-बदल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। रोजगार, सड़क, पर्यटन और बागवानी जैसे स्थानीय मुद्दों पर जनदबाव तेज हो सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की तीव्रता, भूस्खलन या प्राकृतिक असंतुलन प्रशासन की परीक्षा ले सकते हैं, जिससे राजनीतिक जवाबदेही भी बढ़ेगी।

अंक ज्योतिष का संकेत: 7 का रहस्य

पंडित डोगरा ने कहा कि अंक गणना के अनुसार 3-3-2026 का योग 7 बनता है, जो रहस्य, गुप्त रणनीति, पर्दे के पीछे गठबंधन और अचानक खुलासों का अंक माना जाता है। उनके अनुसार इसका अर्थ है कि राजनीति में जो दृश्य होगा, उसके पीछे कहीं अधिक गहरी रणनीति कार्यरत रहेगी। कुछ बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर लग सकती है, वहीं नए नेतृत्व का उदय भी संभव है।

राशियों पर प्रभाव

पंडित डोगरा के मुताबिक इस ग्रहण का अलग-अलग राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मेष, सिंह और मकर से जुड़े नेतृत्व वर्ग के लिए प्रतिष्ठा की परीक्षा का समय रहेगा।

वृषभ और तुला को आर्थिक व कानूनी मामलों में सावधानी बरतनी होगी। मिथुन और धनु को बयानबाजी में संयम रखना‌ होगा। वहीं, कर्क और वृश्चिक को गुप्त विरोधियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।

कन्या राशि वालों पर स्वास्थ्य और संगठनात्मक दबाव रह सकता है। कुंभ को जनसमर्थन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है, जबकि मीन राशि के लिए आध्यात्मिक व सामाजिक प्रभाव बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि समग्र रूप से सूर्य और चंद्र, दोनों ग्रहणों का यह संयोग राजनीतिक पुनर्संतुलन, नीतिगत परिवर्तन, सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे टकराव तथा जनमत में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। पंडित डोगरा ने कहा कि यह समय सजगता, पारदर्शिता और दूरदर्शिता का है, जो नेतृत्व परिस्थिति को समझकर जनहित में निर्णय लेगा, वही स्थिरता बनाए रख पाएगा।

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