पंडित उमेश नौटियाल के अनुसार 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा करवाचौथ; सरगी का समय सुबह 3:30 से 5:30 बजे तक और शाम की पूजा का मुहूर्त 5:38 से 6:56 बजे तक
करवाचौथ के पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है। इस वर्ष करवाचौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। व्रत की शुरुआत सुबह सरगी ग्रहण करने के साथ होती है और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। इस वर्ष 29 अक्टूबर को रात 8:05 बजे चंद्रोदय होगा।
पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि करवाचौथ, जिसे कारक चतुर्थी भी कहा जाता है, उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व रखता है। इस दिन मां गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा की जाती है तथा चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की दीर्घायु की कामना की जाती है।
शुक्र अस्त के बावजूद रख सकेंगी व्रत
पंडित उमेश नौटियाल के अनुसार, 28 अक्टूबर को शुक्र अस्त हो रहा है और इसका बाल्य दोष 30 अक्टूबर तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं के अनुसार, एक बार शुरू किए गए व्रत को छोड़ा या तोड़ा नहीं जाता।
ऐसे में सुहागिन और नवविवाहित महिलाएं करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। हालांकि, शुक्र अस्त के दौरान व्रत का उद्यापन और बड़े पूजा-विधान नहीं किए जा सकते तथा सामूहिक पूजा से भी बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहली बार करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं भी व्रत कर सकती हैं, लेकिन उन्हें बड़े पूजा-विधानों और उद्यापन से बचना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि ऋतुकाल में होने वाली महिलाएं भी बिना पूजा किए निर्जला व्रत रख सकती हैं।
करवाचौथ 2026: सरगी और पूजा का समय
करवाचौथ के दिन सरगी ग्रहण करने का समय सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे तक बताया गया है। इसके बाद व्रत निर्जल और निराहार रहता है। शाम को पूजा का मुहूर्त 5:38 बजे से 6:56 बजे तक रहेगा। रात 8:05 बजे चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जा सकता है।
पंडित उमेश नौटियाल के अनुसार, गर्भवती महिलाएं भी व्रत रख सकती हैं, लेकिन वे इस दौरान हल्का फलाहार ले सकती हैं।
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