नई दिल्ली
प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर की गई घोषणाओं को अब धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने देश की 'औद्योगिक संप्रभुता' (Industrial Sovereignty) सुनिश्चित करने के लिए 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का रोडमैप तैयार किया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 6 प्रमुख कर्तव्यों और 7 फोकस सेक्टर्स की पहचान की गई है, जो भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में गेम-चेंजर साबित होंगे।
बायो-फार्मा शक्ति: ₹10,000 करोड़ से किफायती दवाओं का मिशन
फार्मास्यूटिकल सेक्टर में नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के लिए 'बायो-फार्मा शक्ति' योजना का आगाज किया गया है। अगले 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ का निवेश। देश में 3 नए राष्ट्रीय बायो-फार्मा संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जबकि 7 पुराने संस्थानों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा।
सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) को हाई-टेक बनाया जाएगा ताकि भारतीय दवाओं की वैश्विक साख और मजबूत हो सके।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: ₹40,000 करोड़ का निवेश
तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन के दायरे को व्यापक बनाया है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग में मिली सफलता के बाद सरकार ने ₹40,000 करोड़ के नए खर्च का प्रस्ताव रखा है। इस सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती 'स्किल्ड वर्कफोर्स' है, जिसके लिए विशेष उद्योग आधारित प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे।
रेयर अर्थ मिशन: चीन पर निर्भरता खत्म करने की रणनीति
महत्वपूर्ण खनिजों (Strategic Minerals) के लिए आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने चार राज्यों में विशेष कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है। ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। यह कदम इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवश्यक खनिजों की घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करेगा।
MSME और शहरी विकास: अर्थव्यवस्था के नए 'चैम्पियन'
छोटे उद्योगों (MSME) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' में विशेष प्रावधान हैं। साथ ही, शहरी आर्थिक ढांचे को इस तरह विकसित किया जाएगा कि शहर केवल रहने के स्थान नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के 'पावरहाउस' बनकर उभरें।
₹54.1 लाख करोड़ के विशाल बजट विजन के साथ 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' यह स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल दुनिया का 'असेंबली लाइन' नहीं रहना चाहता। सरकार का पूरा फोकस अब 'इनोवेशन-लेड मैन्युफैक्चरिंग' पर है। उच्च स्तरीय समितियों के सुझावों पर आधारित ये सुधार राज्य सरकारों के समन्वय से लागू किए जाएंगे, जिससे जमीनी स्तर पर रोजगार और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।