धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले मामलों में प्रथमदृष्टया अपराध बनता है: हाईकोर्ट; हालांकि मंजूरी के अभाव में नालागढ़ अदालत की कार्यवाही रद्द की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रामपाल के 13 अनुयायियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। इन लोगों पर हिंदू देवी-देवताओं और संतों को लेकर आपत्तिजनक सामग्री वाली किताबें वितरित करने का आरोप लगाया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले मामलों में प्रथमदृष्टया अपराध बनता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण या असीमित नहीं है, बल्कि यह लोक व्यवस्था और कानून के दायरे में आता है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाई सीमाओं का दिया हवाला
जस्टिस राकेश कैंथला ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता जिससे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों या सामाजिक शांति प्रभावित हो।
मंजूरी के अभाव में नालागढ़ अदालत की कार्यवाही रद्द
हालांकि, हाईकोर्ट ने सोलन जिले की नालागढ़ अदालत में चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य से जुड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाने के लिए सक्षम अधिकारी से आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी।
अदालत ने कहा कि बिना वैधानिक मंजूरी के मामले में संज्ञान लेना अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
मंजूरी मिलने के बाद नई कार्यवाही शुरू करने की छूट
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष कानून के अनुसार आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने के बाद नई कार्यवाही शुरू करने के लिए स्वतंत्र है। अदालत का यह आदेश राज्य को वैध प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई करने से नहीं रोकता है।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube