पंडित शशि पाल डोगरा ने बताया दीपावली का धार्मिक और अंक ज्योतिषीय महत्व, मूलांक 8 और भाग्यांक 2 का रहेगा विशेष संयोग
रोशनी, खुशहाली और सुख-समृद्धि का प्रतीक दीपावली का पर्व इस वर्ष रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। बाजारों में खरीदारी शुरू हो चुकी है और घरों में साफ-सफाई, सजावट तथा पूजन की तैयारियां की जा रही हैं।
अंक ज्योतिषी पंडित शशि पाल डोगरा, अध्यक्ष वशिष्ठ ज्योतिष सदन ने बताया कि दीपावली पर माता महालक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के अधिपति कुबेर देव की पूजा का विशेष विधान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली को प्रकाश पर्व के रूप में मनाने की परंपरा जुड़ी हुई है।
दीपावली पर अमावस्या तिथि का महत्व
पंडित शशि पाल डोगरा के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह लगभग 11:28 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12:32 बजे समाप्त होगी। इस कारण दीपावली का मुख्य लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर की शाम को किया जाएगा।
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का मुख्य शुभ मुहूर्त शाम 5:50 बजे से 7:44 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:27 बजे से रात 8:06 बजे तक रहेगा। इस दौरान वृषभ लग्न का संयोग भी बनेगा, जिसे स्थिर लग्न माना जाता है। परंपरागत मान्यता के अनुसार स्थिर लग्न में माता लक्ष्मी का पूजन विशेष शुभ माना जाता है।
निशीथ काल में पूजा का समय
रात्रि में विशेष पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए निशीथ काल का समय भी महत्वपूर्ण रहेगा। शिमला में निशीथ काल लगभग रात 11:40 बजे से 9 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद 12:33 बजे तक रहेगा।
इस दौरान अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी। विशेष तांत्रिक और रात्रिकालीन साधना करने वाले साधक अपनी परंपरा और योग्य आचार्य के निर्देशानुसार पूजा कर सकते हैं। सामान्य गृहस्थ परिवारों के लिए प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन प्रमुख माना गया है।
इस विधि से करें लक्ष्मी-गणेश पूजन
पंडित शशि पाल डोगरा के अनुसार दीपावली के दिन घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करके पूजा स्थल को सजाना चाहिए। शाम को शुभ मुहूर्त में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। इसके बाद माता लक्ष्मी को पुष्प, अक्षत, रोली, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। कुबेर देव का भी विधि-विधान से पूजन करें। व्यापारी वर्ग इस दिन बहीखातों और तिजोरी का पूजन भी करता है। पूजा के बाद परिवार सहित आरती करें और घर के मुख्य द्वार, आंगन तथा मंदिर में दीप जलाएं।
अंक ज्योतिष के अनुसार विशेष रहेगा दीपावली का पर्व
पंडित शशि पाल डोगरा ने बताया कि इस वर्ष दीपावली की तारीख 8-11-2026 का अंक गणित विशेष है। तारीख का मूलांक 8 बनता है, जबकि पूरी तारीख का योग 20 और उसका एकल अंक 2 है। इस तरह इस दिन मूलांक 8 और भाग्यांक 2 का विशेष संयोग रहेगा। रविवार होने के कारण दिन के साथ सूर्य का प्रभाव भी जुड़ता है।
अंक ज्योतिष में मूलांक 8 का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है। यह अंक कर्म, अनुशासन, धैर्य, न्याय, जिम्मेदारी और मेहनत का प्रतीक है। वहीं भाग्यांक 2 का संबंध चंद्रमा से माना जाता है, जो मन, भावनाओं, शांति, सहयोग और पारिवारिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है। रविवार का संबंध सूर्य से है, जिसे आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक माना जाता है।
मूलांक 8 और भाग्यांक 2 का क्या है संकेत?
पंडित शशि पाल डोगरा के अनुसार अंक 8 और अंक 2 का मेल व्यक्ति को कर्म के साथ धैर्य और विवेक बनाए रखने का संदेश देता है। शनि मेहनत और अनुशासन का प्रतीक है, जबकि चंद्रमा मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं सूर्य का प्रभाव आत्मविश्वास और सकारात्मक संकल्प को महत्व देता है।
उनके अनुसार अंक ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह पर्व आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने, पुराने अधूरे कार्यों को पूरा करने, बचत की आदत विकसित करने और परिवार में आपसी सहयोग बढ़ाने का संदेश देता है। विशेष रूप से व्यापारियों को अपने कार्यों में पारदर्शिता, अनुशासन और दीर्घकालीन योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
धन के साथ संस्कार और स्वास्थ्य भी जरूरी
पंडित शशि पाल डोगरा ने कहा कि दीपावली केवल धन प्राप्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता, सद्भाव, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी देता है। माता लक्ष्मी की कृपा के साथ भगवान गणेश का आशीर्वाद जीवन में बुद्धि और विवेक प्रदान करता है।
उन्होंने लोगों से दीपावली पर जरूरतमंदों की सहायता करने, मिट्टी के दीपक जलाने और पर्यावरण के अनुकूल त्योहार मनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वास्तविक समृद्धि केवल धन से नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, परिवार के सुख, सामाजिक सम्मान, सदाचार और संतोष से प्राप्त होती है। सभी को दीपावली का पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और उल्लास के साथ मनाना चाहिए।
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