सोलन : हिमाचल प्रदेश में शास्त्रीय और लोक संगीत के संरक्षण व संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाली गुरु–शिष्य परंपरा एवं शास्त्रीय संगीत संस्थान (हिमाचल प्रदेश) के लिए यह गर्व का क्षण रहा, जब संस्थान के संस्थापक डॉ.
राम स्वरूप शांडिल को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को सरकाघाट में मुख्यमंत्री द्वारा ‘प्रेरणा स्त्रोत पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मिलने के उपरांत संस्थान से जुड़े कलाकारों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों द्वारा डॉ. शांडिल का विशेष रूप से अभिनंदन एवं सम्मान किया गया।
डॉ. राम स्वरूप शांडिल ने वर्ष 1992 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संगीत विषय में पीएचडी उपाधि प्राप्त की, इसके पश्चात उन्होंने 2009 से 2017 तक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं और अनेक विद्यार्थियों को संगीत की विधिवत शिक्षा प्रदान की संगीत के क्षेत्र में उनका जुड़ाव दशकों पुराना है,
वे वर्ष 1976 से ऑल इंडिया रेडियो पर नियमित रूप से अपने संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत करते आ रहे हैं जिससे उनकी कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
डॉ. शांडिल वर्ष 2008 से गुरु–शिष्य परंपरा एवं शास्त्रीय संगीत संस्थान के माध्यम से संगीत के उत्थान और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं, शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ लोक संगीत में भी उनकी गहरी पकड़ है और वे लोक संगीत में ए ग्रेड गायक के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
संगीत रचना के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का कुल गीत वर्ष 2011 में डॉ. राम स्वरूप शांडिल द्वारा ही रचित (कम्पोज़) किया गया, जो आज भी विश्वविद्यालय की पहचान बना हुआ है। अब तक वे 130 से अधिक संगीत रचनाएं तैयार कर चुके हैं।
डॉ. शांडिल के मार्गदर्शन में अनेक नामचीन कलाकार जैसें प्रसिद्ध पहाड़ी गायक मदन झालटा, रमेश दत्त और सीताराम उनके शिष्य रह चुके हैं, इतना ही नहीं उनके सान्निध्य में शिक्षा प्राप्त कर चुके करीब 40 विद्यार्थी संगीत विषय में डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं,
जो उनके शिक्षण और साधना की गुणवत्ता को दर्शाता है। प्रेरणा स्त्रोत पुरस्कार मिलने पर संस्थान से जुड़े लोगों ने इसे पूरे संगीत जगत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि डॉ. राम स्वरूप शांडिल का जीवन और उनका संगीत साधना भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।