नालागढ़ क्षेत्र में कराए गए नवीनतम सॉइल टेस्ट में मिट्टी की सेहत को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। सॉइल टेस्ट ऑफिसर डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग ने इस वर्ष 6,250 मिट्टी नमूनों का लक्ष्यतय किया था। वहीं खरीफ और रबी सीजन में कुल 723 नमूने लिए गए, जबकि नालागढ़ के लिए भी इसी स्तर का लक्ष्य निर्धारित था।
डॉ. शर्मा के अनुसार, किसानों द्वारा हाथ से लाए गए मिट्टी सैंपलों में पीएच स्तर अधिकांश क्षेत्रों में संतुलित पाया गया है, जो मिट्टी की अम्लीयता और क्षारीयता के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत है।
हालांकि, जांच में सबसे बड़ा मुद्दा नालागढ़ क्षेत्र में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी के रूप में सामने आया है। यह कमी बताती है कि मिट्टी में पोषक तत्वों को संजोकर रखने की क्षमता घट रही है, जिसके कारण फसल वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि इस स्थिति को सुधारने के लिए कृषि विभाग किसानों को जैविक खाद, गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद और प्राकृतिक खेती की तकनीकों का अधिक उपयोग करने की सलाह दे रहा है।
इसके अलावा, विभाग जल्द ही ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएगा ताकि किसान मिट्टी सुधारने के उपायों को अपनाकर भूमि की सेहत को बेहतर बना सकें।