16 हजार रुपये की स्वदेशी तकनीक से लोग, वस्तुएं, ट्रैफिक और रास्तों की मिलेगी रियल टाइम जानकारी; भारत समेत कई देशों में बढ़ी मांग।
दृष्टिबाधित लोगों के लिए तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। एनआईटी हमीरपुर के पूर्व छात्र और जयपुर के युवा उद्यमी ऋषभ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्मार्ट ग्लास और टॉकिंग स्टिक विकसित की है, जो दृष्टिबाधित लोगों को आसपास की दुनिया को समझने में मदद कर रही है।
यह स्मार्ट डिवाइस सामने मौजूद लोगों, वस्तुओं, ट्रैफिक, रास्तों और आसपास के माहौल की जानकारी रियल टाइम में आवाज के माध्यम से देती है। तकनीक की मदद से दृष्टिबाधित व्यक्ति अधिक आत्मनिर्भर होकर सुरक्षित तरीके से चल-फिर सकते हैं।
16 हजार रुपये में उपलब्ध स्वदेशी तकनीक
खास बात यह है कि विदेशी कंपनियों के ऐसे उपकरणों की कीमत जहां 50 हजार रुपये या उससे अधिक है, वहीं ऋषभ द्वारा विकसित भारतीय तकनीक आधारित स्मार्ट ग्लास और टॉकिंग स्टिक करीब 16 हजार रुपये में उपलब्ध है।
यह डिवाइस रंग, आकार, मुद्रा और आसपास की वस्तुओं की पहचान करने में सक्षम है। इसके अलावा यह किताबें पढ़ने और वातावरण का विवरण देने में भी मदद करती है।
एनआईटी हमीरपुर से शुरू हुआ स्टार्टअप का सफर
जयपुर निवासी ऋषभ ने वर्ष 2023 में एनआईटी हमीरपुर से कंप्यूटर साइंस में ड्यूल डिग्री पूरी की। वर्ष 2022 में उन्होंने एनआईटी हमीरपुर के इंक्यूबेशन सेंटर में अपने स्टार्टअप का विचार प्रस्तुत किया था।
चयन के बाद उन्हें मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत पांच लाख रुपये की इग्निशन ग्रांट मिली। इसके बाद इंक्यूबेशन सेंटर में इस तकनीक को विकसित किया गया और वर्ष 2024 में उत्पाद डिजाइन का पेटेंट भी प्राप्त हुआ।
AI तकनीक ऐसे करती है काम
स्मार्ट ग्लास में—
लगे हुए हैं, जो ब्लूटूथ के माध्यम से मोबाइल एप से जुड़े रहते हैं।
कैमरा आसपास मौजूद लोगों, वस्तुओं, ट्रैफिक संकेतों और रास्ते की स्थिति को पहचानता है। इसके बाद एआई सिस्टम कुछ ही सेकंड में इस जानकारी का विश्लेषण कर उपयोगकर्ता को आवाज के जरिए जानकारी देता है।
यह तकनीक बता सकती है कि—
सामने कौन व्यक्ति मौजूद है
कौन-सी वस्तु रखी है
रास्ते में कौन-सी बाधा है
वस्तु का रंग और आकार क्या है
मुद्रा की पहचान क्या है
इसके अलावा यह किताबों के पाठ को पढ़कर भी सुनाने में सक्षम है।
टॉकिंग स्टिक से सुरक्षित होगी आवाजाही
एआई आधारित टॉकिंग स्टिक दृष्टिबाधित लोगों की सुरक्षित आवाजाही में मदद करती है। यह रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहले ही पहचानकर उपयोगकर्ता को सतर्क कर देती है।
इससे सड़क पर चलने, रास्ता पहचानने और दैनिक कार्यों को करने में दृष्टिबाधित लोगों को काफी सुविधा मिल रही है।
यूके समेत कई देशों में पहुंची तकनीक
ऋषभ के अनुसार इस तकनीक की मांग भारत के साथ-साथ विदेशों में भी बढ़ रही है। अब तक भारत के विभिन्न राज्यों में 700 से अधिक स्मार्ट डिवाइस दृष्टिबाधित लोगों तक पहुंच चुके हैं।
उन्होंने बताया कि यूके में करीब 100 डिवाइस निर्यात किए जा चुके हैं। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और दुबई सहित कई देशों से भी इस तकनीक के लिए मांग प्राप्त हुई है।
एनआईटी हमीरपुर ने जताई खुशी
एनआईटी हमीरपुर इंक्यूबेशन सेंटर की प्रभारी डॉ. पमिता अवस्थी ने कहा कि यह संस्थान से निकला ऐसा स्टार्टअप है, जिसने दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के नवाचार समाज की जरूरतों को पूरा करने के साथ युवाओं में उद्यमिता को भी बढ़ावा देते हैं।
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